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Hindi, Poetry

विडंबना (VIDAMBANA)

तुम क्या जानो कि कैसे आंसुओं को रोक हँसते हैं हम
नींदों ने भी तभी बुलाया जब उठने की मजबूरी रही
आराम की चाहत भी कमबख्त दस्तक तभी देती है दिल पे
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रफ्तार (RAFTAAR)

मैं इतना मसरूफ़ भी नहीं हूँ कि
शहर कि किसी गली में लड़ते हुए कुत्तों को खड़े होकर न देखूँ ।

शहर में लोग भी गाड़ी जैसे ही चलते हैं Continue reading
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सफर (SAFAR)

आज अचानक सारे रास्ते खत्म हो गए
मुड़कर देखा तो पता चला
सफर हमेशा अकेले ही था
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खुशबू (KHUSHBOO)

आज मेरी खिड़की से आई ताज़ा हवा
एक पुरानी याद दिला गयी

मेरी नानी के घर की याद।
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रक्षा बंधन (RAKSHA BANDHAN)

मुझे यह त्यौहार एक हार की याद दिलाता है
एक टूटे रिश्ते की
यह राखी एक लम्बी टूटी हुई कहानी का छोटा हिस्सा है।
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रिश्ते (RISHTEY)

रिश्ते ऐसे ख़त्म होते हैं जैसे
किसी बड़े कार्यक्रम के बाद सारी सजावट उतर जाती है
मैदान और मंच खाली हो जाते हैं
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